Diwali Boom के बाद Gold Crash — जानें 5 बड़ी वजहें!

दिवाली और धनतेरस के समय भारत में सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊँचाइयों पर थीं। उदाहरण के लिए, 24 कैरेट सोने की कीमत 10 ग्राम के लिए लगभग ₹1,34,800 तक पहुँच गई थी। लेकिन दिवाली के बाद अचानक गिरावट देखने को मिली — करीब 3 से 5 प्रतिशत की कमी के साथ। तो आइए जानें कि क्यों ऐसा हुआ — ये हैं 5 बड़ी वजहें:
1. मुनाफा (Profit-booking) निकलना
जब सोने ने तेज़ी से उछाल लिया था, तो निवेशक और ट्रेडर्स अपने मुनाफे को सुरक्षित करने लगे। विशेष रूप से दिवाली के बाद, “अब ठीक लगा समय है मुनाफा निकालने का” की सोच प्रमुख रही। इससे घरेलू बाजार में बिकवाली बढ़ी और कीमतों पर नीचे की ओर दबाव बना।
2. त्योहार के बाद मांग का घट जाना
भारत में त्योहारों के दौरान सोने की मांग बढ़ जाती है — जैसे धनतेरस-दिवाली के समय। मगर जैसे ही त्योहार खत्म हुआ, मांग ठंडी पड़ी। इस वजह से कीमतों में समायोजन (correction) आया क्योंकि उत्सव-मंगल की “खरीदारी लहर” समाप्त हो गई थी।
3. वैश्विक आर्थिक एवं मुद्रा-प्रभावसोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर, बांड यील्ड, और भू-राजनीतिक तनावों के प्रति संवेदनशील है। दिवाली के बाद देखा गया कि डॉलर मजबूत हुआ, बांड यील्ड्स बढ़ गई और भू-राजनीतिक तनावों में कुछ कमी दिखी — ये सब सोने की कीमतों में गिरावट के कारण बने।
4. तकनीकी स्थिति: ‘ओवरबॉट’ मार्केट और वैश्विक समायोजन
इस वर्ष सोने ने अत्यधिक तेजी दिखाई थी। जब किसी संपत्ति ने तेजी से उछाल लिया हो, तो बाद में समायोजन (correction) स्वाभाविक होता है। विशेषज्ञों ने इसे “short-term correction” माना है, “long-term decline” नहीं। India TV News+1
5. निर्यात-आयात, मुद्रास्फीति और घरेलू कारक
भारत में सोने का आयात होता है और रुपये-डॉलर विनिमय दर तथा आयात शुल्क का असर पड़ता है। उदाहरण के लिए, कुछ नीति-शिफ्ट्स और आयात शुल्क में बदलाव ने भी माहौल बदल दिया है। India Today+1
तो क्या अभी सोना खरीदना सही होगा?
विश्लेषकों का कहना है कि यह गिरावट पूरी तरह से डरने वाला संकेत नहीं है—यह एक संक्षिप्त समायोजन हो सकती है। यदि आप दीर्घ-कालीन निवेश के रूप में सोना लेने की सोच रहे हैं तो यह अवसर हो सकता है लेकिन यदि शॉर्ट-टर्म स्पेकुलेशन के लिए खरीदने की योजना है, तो “थोड़ा इंतज़ार करना समझदारी” हो सकती है।
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