अहमदाबाद: केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने मोंटू पटेल को भारतीय फार्मेसी परिषद (पीसीआई) के अध्यक्ष पद से हटा दिया है।इस हटाने का मुख्य कारण है उन पर लग रहे भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोप।

जुलाई 2025 में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने मोंटू पटेल के घर और कार्यालयों में छापे मारे। उन पर आरोप है कि उन्होंने नियमों का उल्लंघन कर कॉलेजों को मंजूरी दी और विभागों का निरीक्षण प्रभावित किया। खबरों के अनुसार, केवल 13 दिनों के भीतर लगभग 870 फार्मेसी कॉलेजों को मंजूरी दी गई थी — जो एक असाधारण संख्या है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि अब मोंटू पटेल न तो PCI के सदस्य हैं और न ही गुजरात राज्य फार्मेसी काउंसिल के सदस्य — इस कारण से उनकी सदस्यता समाप्त हो गई है। फार्मेसी अधिनियम, 1948 की धारा 5(1) और धारा 7 के अनुसार, अध्यक्ष को केवल केंद्रीय परिषद के एक सक्रिय सदस्य के रूप में ही पद पर रहना चाहिए। यदि सदस्यता समाप्त होती है, तो पद स्वतः शून्य हो जाता है।मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि नए अध्यक्ष के चुनाव तीन महीने के भीतर हों। इस बीच सीनियर उपाध्यक्ष जसुभाई चौधरी को अंतरिम अध्यक्ष की भूमिका संभालने का प्रस्ताव है।
मोंटू पटेल का पद से हटना सिर्फ एक व्यक्ति के लिए घटना नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि शासन और शिक्षा संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की ज़रूरत है। छात्रों, शिक्षकों और नियामकों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि शिक्षा व्यवस्था भ्रष्टाचार से मुक्त रहे और हर स्तर पर उचित निरीक्षण हो।
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