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चीन के संबंधों में पिघलने के बावजूद भारत में टिकटॉक पर प्रतिबंध क्यों बना हुआ है!

भारत ने 29 जून, 2020 को टिकटॉक और 58 अन्य चीनी मूल के ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था और प्रतिबंध अभी भी पूरी तरह से प्रभावी है।यह निर्णय उस समय लिया गया जब भारत-चीन सीमा पर गलवान घाटी में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई थी। सरकार ने इस कदम को राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा गोपनीयता से जोड़ते हुए कहा था कि ये ऐप्स भारतीय उपयोगकर्ताओं के डेटा को असुरक्षित तरीके से चीन के सर्वर पर भेज रहे हैं, जिससे देश की संप्रभुता और अखंडता को खतरा हो सकता है।
आज, पाँच साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह प्रतिबंध पूरी तरह प्रभावी है। सरकार ने हाल ही में साफ किया है कि टिकटॉक या किसी भी अन्य प्रतिबंधित ऐप को अनब्लॉक करने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। यानी, भारत में टिकटॉक का वापसी अभी असंभव है और प्रतिबंध उसी कड़ाई से लागू है जैसे 2020 में किया गया था।
इस प्रतिबंध के पीछे न सिर्फ डेटा सुरक्षा थी, बल्कि एक रणनीतिक राजनीतिक संदेश भी था—’आत्मनिर्भर भारत’ के तहत विदेशी तकनीकों पर निर्भरता कम करने की नीति का पालन। टिकटॉक जैसे ऐप्स को हटाकर भारतीय टेक-इकोसिस्टम को बढ़ावा देने का यह एक स्पष्ट संकेत था 

हालांकि कुछ रिपोर्ट्स ने दावा किया कि टिकटॉक की वेबसाइट कुछ उपयोगकर्ताओं के लिए सीमित रूप से फिर से खुल गई है, लेकिन यह एक पूरी तरह अनविलम्ब वापसी नहीं है। ऐप स्टोर पर टिकटॉक अभी भी उपलब्ध नहीं है, और लॉग इन या वीडियो देखना संभव नहीं है  ।

सरकार ने दोहराया है कि अभी तक कोई नीति परिवर्तन नहीं हुआ है, और यह स्पष्ट कर दिया गया है कि जो खबरें टिकटॉक के अनब्लॉ्क होने की हैं, वे झूठी और भ्रामक हैं   

प्रतिबंध ने भारतीय डिजिटल मीडिया पर भी गहरा प्रभाव डाला है। टिकटॉक की अनुपस्थिति ने स्थानीय विकल्पों जैसे मोज (Moj), चिंगारी, और एमएक्स टका-तक (MX TakaTak) को बढ़ावा दिया। इनमें से कई ने बड़े डाउनलोडसंख्या और स्थानीय प्रभाव प्राप्त किए—विशेष रूप से मोज, जिसने शुरुआती वर्ष में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की  ।

हालाँकि, भारत-चीन के बीच रिश्तों में सुधार और “थॉ” (thaw) की स्थिति ने इस बात की आशा ज़रूर जगायी है कि भविष्य में किसी स्तर पर नियमों में नरमी हो सकती है। फिर भी, टिकटॉक प्रतिबंध वर्तमान में राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा गोपनीयता चिंताओं की वजह से स्थिर बना हुआ है।

भविष्य में, यदि चीन-भारत संबंधों में स्थिरीकरण और भरोसा बढ़ता है, तो डिजिटल सहयोग या नीति में बदलाव की गुंजाइश हो सकती है—लेकिन फिलहाल प्रतिबंध मजबूती से बना हुआ है।

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