1 जुलाई को भारत में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस (Doctors’ Day) मनाया जाता है। यह दिन प्रसिद्ध डॉक्टर और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. बिधान चंद्र रॉय की स्मृति में मनाया जाता है। उन्होंने चिकित्सा और समाज सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

आज, 1 जुलाई 2025 को भारत में राष्ट्रीय डॉक्टर्स दिवस मनाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम “Behind the Mask: Who Heals the Healers?” डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य और देखभाल के महत्व को रेखांकित करती है। वहीं सरकार, समाज और व्यक्तियों द्वारा डॉक्टरों के योगदान को खूब सराहा जा रहा है। फिर भी विशेषज्ञों का कहना है कि डॉक्टर्स के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर गंभीर ध्यान देने की आवश्यकता है।

मुख्य बातें जो थीम उजागर करती है:
1. “मास्क के पीछे”
डॉक्टर अक्सर मेडिकल मास्क और गंभीरता के साथ पेश आते हैं। लेकिन उनके पीछे भी एक इंसान है—जिसे थकावट, तनाव, और भावनात्मक दबाव महसूस होता है।
2. “डॉक्टरों को कौन चंगा करता है?”
यह सवाल समाज से है:
जो दिन-रात दूसरों को ठीक करते हैं, उनकी मानसिक सेहत, वर्क-लाइफ बैलेंस और इमोशनल सपोर्ट का ध्यान कौन रखेगा?
3. मानसिक स्वास्थ्य पर ज़ोर
रिपोर्ट्स के अनुसार, डॉक्टरों में:
• 30% से अधिक में डिप्रेशन देखा गया,
• 16% आत्महत्या के विचार रखते हैं,
• और 67% तनाव के शिकार हैं।
4. सहानुभूति और समर्थन
समाज, अस्पताल प्रबंधन और सरकार से अपेक्षा की जाती है कि वे डॉक्टरों के लिए:आरामदायक कार्य समय,काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ, और सहयोगी कार्यस्थल सुनिश्चित करें।निष्कर्ष यह थीम का एक आह्वान है—कि हम डॉक्टरों को सिर्फ “सेवक” या “हीरो” न मानें, बल्कि एक मानव के रूप में भी समझें, जो खुद भी सहानुभूति और देखभाल का हकदार है।

प्रधानमंत्री मोदी, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ समेत कई राजनेताओं ने ट्विटर और संवाद माध्यमों से डॉक्टरों के साहस, सेवा, करुणा और योगदान की सराहना की है, उन्हें “मानवता के स्तंभ और स्वास्थ्य के रक्षक” बताया गया है
प्रधानमंत्री मोदी जी ने बताया की भारत में स्वास्थ्य ढांचे को सुधारने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं, और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि डॉक्टरों को वह व्यापक सम्मान मिले, जिसके वे हकदार हैं।

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