धनतेरस का त्यौहार हमेशा से समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, लेकिन इस बार सोने की चमक ने सबको चौंका दिया है। इस धनतेरस पर 24 कैरट सोना 10 ग्राम के लिए ₹1,34,800 के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। यह अब तक की सबसे ऊँची दर मानी जा रही है, जिससे ज्वैलरी शॉप्स में खरीदारों की भीड़ और बढ़ गई है।
आखीर क्यू दामों ने तोडे रेकॉर्ड? सोने की इस उछाल के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण जुड़े हैं। अमेरिका और यूरोप की आर्थिक अनिश्चितता, डॉलर की कमजोरी और केंद्रीय बैंकों द्वारा बढ़ी सोने की खरीद ने गोल्ड को एक सुरक्षित निवेश बना दिया है। वहीं, भारत में बढ़ती मांग और रुपये की गिरावट ने भी कीमतों को और ऊपर धकेला है।
विदेशी बाजार कैसे जिम्मेदार है सोने के भाव बढने मैंअंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने के दामों में भी लगातार मजबूती देखी जा रही है। COMEX मार्केट में सोना $2,650 प्रति औंस तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 18% अधिक है। इसका सीधा असर भारतीय बाजारों में दिखा — क्योंकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा गोल्ड इंपोर्टर देश है।

ग्राहकों में उत्साह और उलझन दोनो हि बढते जा रहे है
धनतेरस पर हर कोई शुभ दिन पर खरीदारी करना चाहता है, लेकिन बढ़ी हुई कीमतों ने ग्राहकों को दुविधा में डाल दिया है। कई लोग अब हल्के डिज़ाइन या छोटे वजन के गहनों की ओर झुक रहे हैं, वहीं कुछ निवेशक “डिजिटल गोल्ड” या “सोने के ETF” खरीदना ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं।
ये तस्करी और बाजार की चाल भी हो सकती सोने की ऊंची कीमतों के साथ देश में सोने की तस्करी के मामलों में भी इजाफा देखा गया है। 2024–25 के बीच 3,000 से ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें लगभग 2.6 टन सोना जब्त किया गया। बढ़े हुए दामों से काला बाजार सक्रिय हो गया है, जिससे सरकार और कस्टम विभाग अलर्ट पर हैं।
चांदी ने दी थोड़ी राहत जहां सोना आसमान छू रहा है, वहीं चांदी की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज हुई है। चांदी ₹1,52,000 प्रति किलो पर कारोबार कर रही है, जिससे कई लोग वैकल्पिक निवेश के रूप में चांदी की ओर रुख कर रहे हैं। छोटे व्यापारी और ग्रामीण बाजारों में चांदी की मांग बढ़ती दिख रही है।
विशेषज्ञों की राय बताती है कि मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि आने वाले कुछ हफ्तों में सोने के दामों में थोड़ी स्थिरता आ सकती है, लेकिन लम्बी अवधि में यह ₹1,40,000 का स्तर भी छू सकता है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्दबाज़ी में खरीदारी न करें, बल्कि दामों के स्थिर होने का इंतजार करें। धनतेरस की इस “गोल्डन चमक” ने भारत की अर्थव्यवस्था, परंपरा और बाजार — तीनों को एक साथ हिला दिया है।
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